Aryan Bhardwaj

November 6,2003-karnal
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Kavya Mera Jo Aur Tumhari Chala

(about starting, as in general , the term starting, start’)


काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला,

था प्रस्थान पहला, या था परिवर्तन नया,

उद्भव उत्कर्ष था, या विलंब था तुम में,

या था केवल प्रारंभ, जो कहता - अनंत तक हूँ मैं


(about the name, नाम as in general)


काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला,

थी पुकार पहली - कारण तुम्हारे, या पहली पुकार का कारण तुम थे,

लिया भी गया, दिया भी गया,

भी थे जन्म पर तुम, और होगे अंत तक भी


(about the first friend as in general)


काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला,

न जांच थी, न ही थी परख,

पर संग में थे तुम, और थे संघ के भी, (संग और संघ अलग हैं)

हँसी की गूंज थी, और आधार का निशब्द सहारा,

न खोज थी तुम्हारी, फिर भी परिचय था अनंत का


(about the first lesson, trust, the lesson with father teaching bicycle, trust vs trust)


काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला,

विश्वास था तुम्हें मुझ पर, और था भरोसा तुम पर मुझे भी


तुम्हारे विश्वास का सहारा था साथ में,

और मेरे भरोसे से थे साथ तुम भी


उपहार इस सूक्ष्म पवित्रता का,

आनी थी जो यह परिपक्व पात्रता




अल्पकालिक क्षण में एहसास सफलता का,

फिर एक घाव छोटा-सा,

न मैं जानता था -

था वह प्रारंभिक, प्रथम पाठ मेरा


...

काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला.....


आरंभ, नाम, साथ और विकास -


काव्य आया मेरा, तुमको छू कर जब,

पाया मैंने तुम में मुझे,

और मुझ में तुमको ही।


काव्य मेरा जो, और तुम्हारी चला,

लौट कर आया - मुझ तक ही।
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